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toothache

नीलगिरी के तेल से दांत दर्द कैसे ठीक करें? तेल से दांत दर्द कैसे ठीक करें? इस लेख में हम इसी बारे में बात करने जा रहे हैं- नीलगिरी का तेल भी दांतों की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसके एंटी-माइक्रोबियल गुण दांतों की सड़न को दूर करने का काम करते हैं। गर्म पानी में दो से तीन बूंद नीलगिरी का तेल मिलाएं। फिर इस पानी से धो लें। कम से कम एक हफ्ते तक ऐसा करने से आपको दांतों की सड़न से छुटकारा मिल जाएगा।

नीलगिरी का तेल (Eucalyptus oil) दांत दर्द को ठीक करने में मदद कर सकता है क्योंकि इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो दांतों के इंफेक्शन को कम करने में मदद करते हैं। इसके इस्तेमाल के तरीके निम्नलिखित हो सकते हैं:

  1. तेल के साथ गरारा करना: एक-दो बूंद नीलगिरी के तेल को पानी के साथ मिलाकर मुंह में दो-तीन मिनट तक गरारा करें। इससे दांतों के बीच में मौजूद इंफेक्शन को कम हो सकता है।
  2. लगाना: नीलगिरी के तेल को दांत के दरार में लगाने से भी दांत दर्द में राहत मिल सकती है। इसे सीधे दर्द की जगह पर लगाएं और इसे वहाँ कुछ समय तक रहने दें।
  3. सुई या गरम पानी के साथ इस्तेमाल: एक छोटी सी सुई के माध्यम से नीलगिरी के तेल को दरार में लगाएं या फिर गर्म पानी में इसे डीप करके दांत के पीछे की जगह तक पहुँचाएं।
  4. नीलगिरी के तेल का वापोराइजेशन: एक कप गर्म पानी में कुछ बूंद नीलगिरी के तेल को डालकर इसे बन्द कर दें। अब उस वापरिया को अपने मुंह के पास रखें और धीरे से सांस लें। यह दांत दर्द में राहत दिलाने में मदद कर सकता है।
  5. विशेष ध्यान: ध्यान रहे कि नीलगिरी के तेल को सीधे इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लें, विशेषकर अगर आपकी स्थिति में कोई गंभीर समस्या है।

यदि दांत दर्द लंबे समय से बना हुआ है या गंभीर है, तो सबसे अच्छा होगा कि आप दाँत के चिकित्सक से सलाह लें और वे आपके लिए सही उपचार का सुझाव दें।

Eucalyptus Oil edited


नीलगिरी का तेल कैसे तैयार किया जाता है?

नीलगिरी या नीलगिरी का तेल शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह तेल इसकी पत्तियों को सुखाकर, कुचलकर और आसवन करके प्राप्त किया जाता है। यह तेल रंगहीन होता है, जिसमें तीखी गंध होती है।

नीलगिरी के तेल में क्या होता है?

नीलगिरी में सिनेओल नामक तत्व होता है, जो इसे औषधीय उपयोग के लिए फायदेमंद बनाता है। यह एक प्राकृतिक तेल है। इस तेल में एंटी-सेप्टिक और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।

नीलगिरी का पेड़ कैसा होता है?

नीलगिरी का पेड़ काफी लंबा और पतला होता है। इसकी पत्तियों से प्राप्त तेल का उपयोग दवा और अन्य रूपों में किया जाता है। पत्तियां लंबी और नुकीली होती हैं और उनकी सतह पर गांठें होती हैं जिनमें तेल जमा होता है।



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