मधुमेह : कारण व उपचार

मधुमेह इन्सुलिन नामक हार्मोन की कमी से होता है। आनुवांशिकता भी इसका एक प्रमुख लक्षण है। मधुमेह के रोगी को अत्यधिक भूख-प्यास, मूत्र और निर्बलता के लक्षणों से युक्त पाया जाता है। उसके पैरों के तलवों में जलन की शिकायत रहती है। मधुमेह के…
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मूत्र प्रणाली में पथरी : कारण व उपचार

मूत्र प्रणाली की पथरियों का निर्माण ज्यादातर कैल्शियम फॉस्फेट या ऑक्सेलेट से होता है।रोगी की पीठ में गुर्दे, कटि प्रदेश (कमर वाले भाग) में दर्द महसूस होता है।। यह दर्द जनन अंगों की ओर फैलता है। इसके अतिरिक्त बुखार, उल्टी, मूख न लगना, नींद…
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मूत्र में रक्त : कारण व उपचार

मूत्र में रक्त आने से उपचार अधिकतर यह रोग पथरी के कारण या मूत्र प्रणाली में किसी संक्रमण के कारण अथवा रक्तस्राव के किसी दूसरे कारण से उत्पन्न होता है।इसमें रोगी को रक्त के साथ मिला हुआ मूत्र अथवा कभी-कभी केवल रक्त के रूप में मूत्र…
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मसूढ़ों की सूजन : कारण व उपचार

मसूढ़ों की सूजन का उपचार अरंडी के तेल में कपूर मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम मसूढ़ों पर मलें। यह प्रयोग मसूढ़ों के रोगों मे अत्यंत लाभकारी है।अजवाइन को तवे पर भूनकर पीस लें। फिर उसमें दो-तीन बूंदे राई के तेल को मिलाकर हल्का-हल्का मसूढ़ों…
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मोतियाबिंद : कारण व उपचार

मोतियाबिंद का उपचार आंखों को तकलीफ हो तो गाय का दूध ज्यादा पीना चाहिए। मेथी, भिंडी, पालक, केला, अंगूर, सेब, नारंगी, अनार आदि ज्यादा खाना चाहिए। खट्टी और तीखी चीजें नहीं खानी चाहिए।तेज रोशनी और मानसिक तनाव से भी बचना जरूरी है क्योंकि…
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मस्से : कारण व उपचार

मस्से के उपचार खट्टे सेब का रस निकालकर दिन में तीन बार मस्सों पर नियमित लेप करने से मस्से ठीक हो जाते हैं। जीरा को पीसकर उसकी लुगदी बनाकर बांधने से | स्रावयुक्त मस्सों से गिरने वाला खून बन्द हो जाता है, जलन मिटती है और बाहर निकले हुए…
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मुंह के छाले : कारण व उपचार

मुंह के छाले का उपचार हल्दी को पानी में डालकर कुछ देर रख दें। इस पानी को छानकर उससे कुल्ले करने से मुंह के छाले नष्ट होते हैं। इलायची के बीजों को कूट-पीसकर लार टपकाने से शीघ्र लाभ होता है।जामुन के कोमल पत्तों को पीसकर, जल में मिलाकर…
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मिर्गी : कारण व उपचार

मिर्गी का उपचार मानसिक विकारों के साथ-साथ कब्ज, पेट में वायु तथा पाचन क्रिया में विकार जैसे कुछ कारण भी इस रोग को बढ़ाने में सहायक हैं इसमें एक प्रकार के दौरे होते हैं।गिलहरी काटकर उसका टका भर रक्त रोगी की नाक में डाल दें तो फिर कभी…
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वातपित्त ज्वर : कारण व उपचार

वातपित्त ज्वर- वात रोग (जिसे पोडाग्रा के रूप में भी जाना जाता है जब इसमें पैर का अंगूठा शामिल हो) एक चिकित्सिकीय स्थिति है आमतौर पर तीव्र प्रदाहक गठिया—लाल, संवेदनशील, गर्म, सूजे हुए जोड़ के आवर्तक हमलों के द्वारा पहचाना जाता है। …
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कैंसर रोग : कारण व उपचार

कैंसर कैसे बनता है और कैंसर रोग का उपचार क्या हैं , आइये इसे जानें ? कैंसर तब शुरू होता है जब कोशिका के डीएनए में कोई त्रुटि (म्यूटेशन) आ जाती है। ये कोशिकाएं फिर अनियंत्रित रूप से विभाजित होती हैं और बढ़ती रहती हैं। ये कोशिकाएं मिल कर …
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